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8.73.4
कया॑ ते अग्ने अङ्गिर॒ ऊर्जो॑ नपा॒दुप॑स्तुतिम् । वरा॑य देव म॒न्यवे॑ ॥ (४)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 8.73.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे सर्वत्र गतिशील एवं शक्ति के पुत्र अग्नि! तुम सबके वरण करने योग्य एवं शत्रुओं का अपमान करने वाले हो. मैं किस स्तोत्र द्वारा तुम्हारी स्तुति करूं. (४)
EN English Translation
O Fire, son of motion and power everywhere! You are all worthy of choice and insulting your enemies. With which psalm should I praise you? (4)