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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 73 • Mantra / Rik 7

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 73 • ऋचा / मन्त्र 7

8.73.7

Mantra ID: 8.73.7

कस्य॑ नू॒नं परी॑णसो॒ धियो॑ जिन्वसि दम्पते । गोषा॑ता॒ यस्य॑ ते॒ गिरः॑ ॥ (७)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.73.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे गार्हपत्य अग्नि! तुम इस समय किसके विचित्र यज्ञकर्मो से प्रसन्न होते हो? तुम्हारी स्तुतियां गायों का लाभ कराने वाली होती हैं. (७)

EN English Translation

O garhapatya agni! Whose strange sacrifices do you rejoice at this time? Your praises are beneficial to the cows. (7)

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