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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 77 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 77 • ऋचा / मन्त्र 3

8.77.3

Mantra ID: 8.77.3

न त्वा॑ बृ॒हन्तो॒ अद्र॑यो॒ वर॑न्त इन्द्र वी॒ळवः॑ । यद्दित्स॑सि स्तुव॒ते माव॑ते॒ वसु॒ नकि॒ष्टदा मि॑नाति ते ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.77.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! विशाल एवं दृढ़ पर्वत भी तुम्हें नहीं रोक पाते. मुझ जैसे स्तोता को तुम जो धन देना चाहते हो, तुम्हें उससे कोई नहीं रोक सकता. (३)

EN English Translation

O Indra! Even the vast and strong mountains can't stop you. No one can stop you from the money you want to give to a parrot like me. (3)

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