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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 79 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 79 • ऋचा / मन्त्र 5

8.79.5

Mantra ID: 8.79.5

त्वमि॑न्द्र य॒शा अ॑स्यृजी॒षी श॑वसस्पते । त्वं वृ॒त्राणि॑ हंस्यप्र॒तीन्येक॒ इदनु॑त्ता चर्षणी॒धृता॑ ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.79.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शक्ति के स्वामी एवं ऋषीज के अधिकारी इंद्र! तुम यशस्वी बनो. तुमने अकेले ही शत्रुओं की हिंसा करने वाले वञ्र द्वारा ऐसे राक्षसों को मारा जिन पर न कोई आक्रमण कर सकता था और न जिन्हें कोई जीत सकता था. (५)

EN English Translation

O Lord of power and ruler of sages Indra! You be successful. You alone killed demons that no one could attack or conquer by the violence of enemies. (5)

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