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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 80 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 80 • ऋचा / मन्त्र 5

8.80.5

Mantra ID: 8.80.5

इ॒मानि॒ त्रीणि॑ वि॒ष्टपा॒ तानी॑न्द्र॒ वि रो॑हय । शिर॑स्त॒तस्यो॒र्वरा॒मादि॒दं म॒ उपो॒दरे॑ ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.80.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! मेरे पिता के केशरहित शीश, खेत और मेरे उदर के नीचे वाले स्थान इन तीनों को उपजाऊ बनाओ. (५)

EN English Translation

O Indra! Make my father's hairless shisha, the farm and the places under my abdomen fertile. (5)

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