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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 81 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 81 • ऋचा / मन्त्र 4

8.81.4

Mantra ID: 8.81.4

अपा॑दु शि॒प्र्यन्ध॑सः सु॒दक्ष॑स्य प्रहो॒षिणः॑ । इन्दो॒रिन्द्रो॒ यवा॑शिरः ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.81.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

शोभन नासिका वाले इंद्र ने भली प्रकार होम करने वाले सुदक्ष नामक ऋषि के दिए हुए सोमरस को पिया था, जो भुने हुए जौ से मिला तथा पात्रों में निचुड़ रहा था. (४)

EN English Translation

Indra, with shobhan nasika, had drunk the somarous given by a well-to-do sage named Sudax, who met the roasted barley and was settling in the characters. (4)

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