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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 83 • Mantra / Rik 12

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 83 • ऋचा / मन्त्र 12

8.83.12

Mantra ID: 8.83.12

त्यं नु मारु॑तं ग॒णं गि॑रि॒ष्ठां वृष॑णं हुवे । अ॒स्य सोम॑स्य पी॒तये॑ ॥ (१२)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.83.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मैं सर्वत्र प्रसिद्ध, पर्वत पर स्थित एवं जलों को बरसाने वाले मरुतों को सोमरस पीने के लिए बुलाता हूं. (१२)

EN English Translation

I call the famous, mountain-rich, and water-raining maruts everywhere, to drink somers. (12)

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