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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 83 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 83 • ऋचा / मन्त्र 3

8.83.3

Mantra ID: 8.83.3

तत्सु नो॒ विश्वे॑ अ॒र्य आ सदा॑ गृणन्ति का॒रवः॑ । म॒रुतः॒ सोम॑पीतये ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.83.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इधर-उधर जाने वाले हमारे सब स्तोता सोमरस पीने के लिए सदा मरुतों की स्तुति करते हैं. (३)

EN English Translation

All our stotas who go around always praise the maruts for drinking somras. (3)

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