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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 84 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 84 • ऋचा / मन्त्र 4

8.84.4

Mantra ID: 8.84.4

श्रु॒धी हवं॑ तिर॒श्च्या इन्द्र॒ यस्त्वा॑ सप॒र्यति॑ । सु॒वीर्य॑स्य॒ गोम॑तो रा॒यस्पू॑र्धि म॒हाँ अ॑सि ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.84.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मैं तिरश्ची नामक ऋषि तुम्हारी सेवा करता हूं. तुम मेरी पुकार सुनो. तुम महान्‌ हो. तुम शोभन संतान वाला एवं गौयुक्त धन हमें दो. (४)

EN English Translation

I serve you a sage named Tiraschi. You listen to my call. You're great. You have a good child and give us the money. (4)

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