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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 85 • Mantra / Rik 10

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 85 • ऋचा / मन्त्र 10

8.85.10

Mantra ID: 8.85.10

म॒ह उ॒ग्राय॑ त॒वसे॑ सुवृ॒क्तिं प्रेर॑य शि॒वत॑माय प॒श्वः । गिर्वा॑हसे॒ गिर॒ इन्द्रा॑य पू॒र्वीर्धे॒हि त॒न्वे॑ कु॒विद॒ङ्ग वेद॑त् ॥ (१०)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.85.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे स्तोता! मुझे पशु प्रदान करने के लिए महान्‌, शक्तिशाली, उन्नत एवं परम कल्याणकारी इंद्र की शोभन स्तुति करो. स्तुति के योग्य इंद्र के लिए तुम बहुत सी स्तुतियां करो. इंद्र हमारे पुत्रों के लिए बहुत धन दें. (१०)

EN English Translation

This is the hymn! Praise the great, powerful, advanced and supremely beneficial Indra for giving me the animal. You do many praises for Indra worthy of praise. Indra give a lot of money for our sons. (10)

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