Popular:
ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 85 • Mantra / Rik 14

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 85 • ऋचा / मन्त्र 14

8.85.14

Mantra ID: 8.85.14

द्र॒प्सम॑पश्यं॒ विषु॑णे॒ चर॑न्तमुपह्व॒रे न॒द्यो॑ अंशु॒मत्याः॑ । नभो॒ न कृ॒ष्णम॑वतस्थि॒वांस॒मिष्या॑मि वो वृषणो॒ युध्य॑ता॒जौ ॥ (१४)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 8.85.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र ने कहा-“मैंने अंशुमती नदी के किनारे गुफा में घूमने वाले कृष्ण असुर को देखा है. वह दीप्तिशाली सूर्य के समान जल में स्थित है. हे अभिलाषापूरक मरुतो! मैं युद्ध के लिए तुम्हें चाहता हूं. तुम युद्ध में उसे मारो.” (१४)

EN English Translation

Indra said, "I have seen Krishna Asura roaming in the cave on the banks of the River Anshumati. It is located in the same water as the bright sun. This wish-filled Maruto! I want you for war. You kill him in the war." (14)

卐 HinduText AI