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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 85 • Mantra / Rik 21

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 85 • ऋचा / मन्त्र 21

8.85.21

Mantra ID: 8.85.21

स वृ॑त्र॒हेन्द्र॑ ऋभु॒क्षाः स॒द्यो ज॑ज्ञा॒नो हव्यो॑ बभूव । कृ॒ण्वन्नपां॑सि॒ नर्या॑ पु॒रूणि॒ सोमो॒ न पी॒तो हव्यः॒ सखि॑भ्यः ॥ (२१)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.85.21 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

वे वृत्रहंता एवं महान्‌ इंद्र जन्म लेने के तुंरत बाद बुलाने योग्य हो गए थे. इंद्र बहुत से मानव हितसाधक कार्य करते हुए पिए हुए सोम के समान मित्रों द्वारा बुलाने योग्य बने थे. (२१)

EN English Translation

They became summoned immediately after the birth of Vrithrahanta and the great Indra. Indra was able to be called by friends like The Drunk Mon while doing many human-benefactors. (21)

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