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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 85 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 85 • ऋचा / मन्त्र 5

8.85.5

Mantra ID: 8.85.5

आ यद्वज्रं॑ बा॒ह्वोरि॑न्द्र॒ धत्से॑ मद॒च्युत॒मह॑ये॒ हन्त॒वा उ॑ । प्र पर्व॑ता॒ अन॑वन्त॒ प्र गावः॒ प्र ब्र॒ह्माणो॑ अभि॒नक्ष॑न्त॒ इन्द्र॑म् ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.85.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! जिस समय तुम अपनी भुजाओं में श्रु का गर्व नष्ट करने वाला तथा मेघ को मारने वाला वज्र धारण करते हो एवं जिस समय मेघ एवं उन में भरा हुआ जल गर्जन करता है, उस समय स्तोता इंद्र के समीप जाते हुए उनकी स्तुति करते हैं. (५)

EN English Translation

O Indra! At the time when you wear a thunderbolt in your arms that destroys the pride of The Shru and kills the cloud, and at the time when the cloud and the water that is filled with them roars, the stotas go near Indra and praise him. (5)

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