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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 86 • Mantra / Rik 15

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 86 • ऋचा / मन्त्र 15

8.86.15

Mantra ID: 8.86.15

तन्म॑ ऋ॒तमि॑न्द्र शूर चित्र पात्व॒पो न व॑ज्रिन्दुरि॒ताति॑ पर्षि॒ भूरि॑ । क॒दा न॑ इन्द्र रा॒य आ द॑शस्येर्वि॒श्वप्स्न्य॑स्य स्पृह॒याय्य॑स्य राजन् ॥ (१५)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.86.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शूर एवं विविध रूपधारी इंद्र! तुम्हारा प्रसिद्ध सत्य मेरी रक्षा करे. हे वज्रधारी इंद्र! नाविक जिस प्रकार जल से पार करता है, उसी प्रकार तुम हमें महान्‌ पाप से पार करो. हे राजा इंद्र! तुम विविध रूप वाला एवं अभिलाषा करने योग्य धन हमें कब दोगे? (१५)

EN English Translation

O brave and diverse Indra! May your famous truth protect me. O thunderbolt Indra! Just as a sailor crosses us by the water, so do you cross us through great sin. O King Indra! When will you give us money of various forms and worth wanting? (15)

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