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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 87 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 87 • ऋचा / मन्त्र 5

8.87.5

Mantra ID: 8.87.5

अ॒भि हि स॑त्य सोमपा उ॒भे ब॒भूथ॒ रोद॑सी । इन्द्रासि॑ सुन्व॒तो वृ॒धः पति॑र्दि॒वः ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.87.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सत्यरूप वाले एवं सोमपानकर्ता इंद्र! तुमने द्यावा-पृथिवी को पराजित किया है. तुम सोमरस निचोड़ने वाले के वर्धक एवं स्वर्ग के स्वामी हो. (५)

EN English Translation

O Indra, the one of truth and the doomshak! You have defeated Dyava-Prithvivi. You are the enhancer of the somras squeezer and the master of heaven. (5)

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