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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 88 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 88 • ऋचा / मन्त्र 6

8.88.6

Mantra ID: 8.88.6

अनु॑ ते॒ शुष्मं॑ तु॒रय॑न्तमीयतुः क्षो॒णी शिशुं॒ न मा॒तरा॑ । विश्वा॑स्ते॒ स्पृधः॑ श्नथयन्त म॒न्यवे॑ वृ॒त्रं यदि॑न्द्र॒ तूर्व॑सि ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.88.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! जिस प्रकार माता पुत्र के पीछे चलती है, उसी प्रकार द्यावा-पृथिवी तुम्हारी शत्रुनाशक बल के पीछे चलती हैं. हे इंद्र! जब तुम वृत्र का वध करते हो, तब तुम्हारे क्रोध को देखकर सभी सेनाएं छिन्न होती हैं. (६)

EN English Translation

O Indra! Just as the mother follows the son, so the dyava-prithvivi follows your enemy-destroying force. O Indra! When you kill Vrittar, all armies are shattered when you see your anger. (6)

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