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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 100 • Mantra / Rik 7

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 100 • ऋचा / मन्त्र 7

9.100.7

Mantra ID: 9.100.7

त्वां रि॑हन्ति मा॒तरो॒ हरिं॑ प॒वित्रे॑ अ॒द्रुहः॑ । व॒त्सं जा॒तं न धे॒नवः॒ पव॑मान॒ विध॑र्मणि ॥ (७)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.100.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे पवमान सोम! पैदा हुए बछड़ों को जिस प्रकार गाएं चाटती हैं, उसी प्रकार हव्यधारक यज्ञ में द्रोहरहित एवं माताओं के समान जल हरे रंग वाले तुमको चाटते हैं. (७)

EN English Translation

O Lord Mon! Just as cows lick the born calves, in the same way, the devotees lick you in the yagya without treason and water green like mothers. (7)

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