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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 102 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 102 • ऋचा / मन्त्र 5

9.102.5

Mantra ID: 9.102.5

अ॒स्य व्र॒ते स॒जोष॑सो॒ विश्वे॑ दे॒वासो॑ अ॒द्रुहः॑ । स्पा॒र्हा भ॑वन्ति॒ रन्त॑यो जु॒षन्त॒ यत् ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.102.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सब देव शत्रुरहित होकर सोम के यज्ञ में मिलते हैं एवं अभिलाषा के योग्य बनते हैं. रमणशील देव सोम का सेवन करते हैं. (५)

EN English Translation

All the gods meet in the yagna of Soma without enemies and become worthy of desire. Ramansheel dev consumes Som. (5)

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