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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 102 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 102 • ऋचा / मन्त्र 6

9.102.6

Mantra ID: 9.102.6

यमी॒ गर्भ॑मृता॒वृधो॑ दृ॒शे चारु॒मजी॑जनन् । क॒विं मंहि॑ष्ठमध्व॒रे पु॑रु॒स्पृह॑म् ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.102.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यज्ञवर्धक जल ने गर्भ के समान सोम को यज्ञ में देखने के लिए पैदा किया है. सोम सबके कल्याणकारक, कवि, परमपूज्य एवं बहुतों के द्वारा अभिलषित हैं. (६)

EN English Translation

The yajnavardhaka water has created soma like the womb to see in the yajna. Soma is the benefactor of all, the poet, the most revered and is admired by many. (6)

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