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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 107 • Mantra / Rik 13

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 107 • ऋचा / मन्त्र 13

9.107.13

Mantra ID: 9.107.13

आ ह॑र्य॒तो अर्जु॑ने॒ अत्के॑ अव्यत प्रि॒यः सू॒नुर्न मर्ज्यः॑ । तमीं॑ हिन्वन्त्य॒पसो॒ यथा॒ रथं॑ न॒दीष्वा गभ॑स्त्योः ॥ (१३)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.107.13 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

अभिलाषा करने योग्य, सबको प्रसन्न करने वाले एवं पुत्र के समान शुद्ध बनाने योग्य सोम सफेद रंग के दशापवित्र पर जाते हैं. वेग वाले लोग रथ को जिस प्रकार तेजी से संग्राम की ओर दौड़ते हैं, उसी प्रकार दोनों हाथों की उंगलियां सोम को जल में मसलती हैं. (१३)

EN English Translation

Mon, who is worthy of desire, pleasing to all and made pure like a son, goes to the white dashapavitra. Just as the people of velocity run the chariot towards the struggle fast, the fingers of both hands rub the mon in the water. (13)

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