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9.107.14
अ॒भि सोमा॑स आ॒यवः॒ पव॑न्ते॒ मद्यं॒ मद॑म् । स॒मु॒द्रस्याधि॑ वि॒ष्टपि॑ मनी॒षिणो॑ मत्स॒रासः॑ स्व॒र्विदः॑ ॥ (१४)
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ऋग्वेद मन्त्र 9.107.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
गमनशील सोम अपने नशीले रस को चारों ओर बहाते हैं. मनीषी, नशीले एवं सबको जानने वाले सोम द्रोणकलश के ऊपर दशापवित्र के ऊंचे भाग पर रस गिराते हैं. (१४)
EN English Translation
The moving mon sheds his intoxicating juices around. Manishi, the drug addict and the knower of all, Som drops the juice on the high part of dashapavitra on Dronkalash. (14)