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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 11 • Mantra / Rik 7

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 11 • ऋचा / मन्त्र 7

9.11.7

Mantra ID: 9.11.7

अ॒मि॒त्र॒हा विच॑र्षणिः॒ पव॑स्व सोम॒ शं गवे॑ । दे॒वेभ्यो॑ अनुकाम॒कृत् ॥ (७)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.11.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! तुम शत्रुधर्षक हो. तुम विचित्र एवं देवों को संतुष्टिकारक हो. तुम हमारी गायों के लिए सरलता से अभिस्रुत होओ. (७)

EN English Translation

Hey Mon! You are a host. You are strange and satisfying to the gods. You are easily possessed for our cows. (7)

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