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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 113 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 113 • ऋचा / मन्त्र 2

9.113.2

Mantra ID: 9.113.2

आ प॑वस्व दिशां पत आर्जी॒कात्सो॑म मीढ्वः । ऋ॒त॒वा॒केन॑ स॒त्येन॑ श्र॒द्धया॒ तप॑सा सु॒त इन्द्रा॑येन्दो॒ परि॑ स्रव ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.113.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे दिशाओं के स्वामी एवं अभिलाषापूरक सोम! तुम ऋजीक देश से आकर रस बरसाओ. तुम्हें शुद्ध एवं सच्चे स्तुतिवचनों व श्रद्धा तथा तप के द्वारा निचोड़ा जाता है. हे सोम! तुम इंद्र के लिए रस बरसाओ. (२)

EN English Translation

O Lord of the directions and the desireful Mon! You come from the rich country and shower the juice. You are squeezed by pure and true praises and by faith and penance. Hey Mon! You shower juice for Indra. (2)

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