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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 113 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 113 • ऋचा / मन्त्र 5

9.113.5

Mantra ID: 9.113.5

स॒त्यमु॑ग्रस्य बृह॒तः सं स्र॑वन्ति संस्र॒वाः । सं य॑न्ति र॒सिनो॒ रसाः॑ पुना॒नो ब्रह्म॑णा हर॒ इन्द्रा॑येन्दो॒ परि॑ स्रव ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.113.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

वास्तविक उग्र और महान्‌ सोम की नीचे गिरने वाली धारा बह रही है. रस वाले सोम का यह रस बह रहा है. हे हरे रंग के सोम! तुम ब्राह्मण द्वारा शुद्ध होते हुए इंद्र के लिए रस नीचे गिराओ. (५)

EN English Translation

The real furious and the stream that falls down of the great mon is flowing. This juice of the juiced mon is flowing. O mon of green! You drop the juice down to Indra while being purified by the Brahmin. (5)

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