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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 22 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 22 • ऋचा / मन्त्र 2

9.22.2

Mantra ID: 9.22.2

ए॒ते वाता॑ इवो॒रवः॑ प॒र्जन्य॑स्येव वृ॒ष्टयः॑ । अ॒ग्नेरि॑व भ्र॒मा वृथा॑ ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.22.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

ये सोम महान्‌ वायु, बादलों की वर्षा एवं अग्नि की ज्वालाओं के समान निकलते हैं. (२)

EN English Translation

These somas come out like great air, rain of clouds and flames of agni. (2)

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