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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 24 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 24 • ऋचा / मन्त्र 5

9.24.5

Mantra ID: 9.24.5

इन्दो॒ यदद्रि॑भिः सु॒तः प॒वित्रं॑ परि॒धाव॑सि । अर॒मिन्द्र॑स्य॒ धाम्ने॑ ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.24.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! जब तुम पत्थरों द्वारा कुचले जाकर दशापवित्र की ओर दौड़ते हो, तब तुम इंद्र के उदर के लिए पर्याप्त होते हो. (५)

EN English Translation

Hey Mon! When you run towards Dashapavitra, crushed by stones, you are enough for Indra's belly. (5)

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