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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 30 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 30 • ऋचा / मन्त्र 1

9.30.1

Mantra ID: 9.30.1

प्र धारा॑ अस्य शु॒ष्मिणो॒ वृथा॑ प॒वित्रे॑ अक्षरन् । पु॒ना॒नो वाच॑मिष्यति ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.30.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इन शक्तिशाली सोम की धाराएं बिना श्रम के ही दशापवित्र पर गिर रही हैं, सोम निचुड़ते समय ध्वनि करते हैं. (१)

EN English Translation

The currents of these powerful Mons are falling on the dashapavitra without labour, the soms make a sound while they are lying. (1)

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