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9.30.3
आ नः॒ शुष्मं॑ नृ॒षाह्यं॑ वी॒रव॑न्तं पुरु॒स्पृह॑म् । पव॑स्व सोम॒ धार॑या ॥ (३)
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ऋग्वेद मन्त्र 9.30.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे सोम! तुम अपनी धाराओं से हमारे विरोधी लोगों को हराने वाला, संतानयुक्त व बहुतों द्वारा चाहने योग्य बल क्षरित करो. (३)
EN English Translation
Hey Mon! You must defeat our opponents with your currents, the offspring and the force that many desire. (3)