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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 32 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 32 • ऋचा / मन्त्र 4

9.32.4

Mantra ID: 9.32.4

उ॒भे सो॑माव॒चाक॑शन्मृ॒गो न त॒क्तो अ॑र्षसि । सीद॑न्नृ॒तस्य॒ योनि॒मा ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.32.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे गाय के दूध-दही से मिले हुए सोम! तुम हिरन के समान द्यावा-पृथिवी को देखते हुए यज्ञ के स्थान में बैठने हेतु जाते हो. (४)

EN English Translation

O Mon mixed with cow's milk-curd! You go to sit in the place of the yajna, looking at the deer-like dyava-prithvi. (4)

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