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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 34 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 34 • ऋचा / मन्त्र 6

9.34.6

Mantra ID: 9.34.6

समे॑न॒मह्रु॑ता इ॒मा गिरो॑ अर्षन्ति स॒स्रुतः॑ । धे॒नूर्वा॒श्रो अ॑वीवशत् ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.34.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हमारी सरल स्तुतियां चलती हुई सोम के साथ मिलती हैं. शब्द करते हुए सोम उन प्रसन्न करने वाली स्तुतियों की अभिलाषा करते हैं. (६)

EN English Translation

Our simple praises are mixed with the moving mon. While making the words, Som craves those pleasing praises. (6)

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