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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 35 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 35 • ऋचा / मन्त्र 2

9.35.2

Mantra ID: 9.35.2

इन्दो॑ समुद्रमीङ्खय॒ पव॑स्व विश्वमेजय । रा॒यो ध॒र्ता न॒ ओज॑सा ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.35.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे जल को प्रेरित करने वाले तथा सभी शत्रुओं को कंपित करने वाले सोम! तुम अपनी शक्ति द्वारा हमें धन देने वाले बनो. (२)

EN English Translation

O Mon, who inspires the water and shakes all the enemies! Be the one who gives us wealth by your power. (2)

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