Popular:
ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 35 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 35 • ऋचा / मन्त्र 5

9.35.5

Mantra ID: 9.35.5

तं गी॒र्भिर्वा॑चमीङ्ख॒यं पु॑ना॒नं वा॑सयामसि । सोमं॒ जन॑स्य॒ गोप॑तिम् ॥ (५)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 9.35.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मैं उन सोम की स्तुतिवचनों द्वारा प्रशंसा करता हूं, जो यजमान को गाएं देते हैं. मैं निचुड़ते हुए सोम को स्थान देता हूं. (५)

EN English Translation

I admire those somas by the eulogisms who sing to the host. I place the squeezing Mon. (5)

卐 HinduText AI