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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 62 • Mantra / Rik 7

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 62 • ऋचा / मन्त्र 7

9.62.7

Mantra ID: 9.62.7

यास्ते॒ धारा॑ मधु॒श्चुतोऽसृ॑ग्रमिन्द ऊ॒तये॑ । ताभिः॑ प॒वित्र॒मास॑दः ॥ (७)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.62.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! तुम्हारी जो मधुर रस टपकाने वाली धाराएं रक्षा के लिए बनाई जाती हैं, उनके साथ तुम दशापवित्र पर बैठो. (७)

EN English Translation

Hey Mon! Sit on the dashapavitra with the sweet juice-dripping streams that are made to protect you. (7)

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