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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 63 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 63 • ऋचा / मन्त्र 2

9.63.2

Mantra ID: 9.63.2

इष॒मूर्जं॑ च पिन्वस॒ इन्द्रा॑य मत्स॒रिन्त॑मः । च॒मूष्वा नि षी॑दसि ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.63.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अतिशय मादक सोम! तुम इंद्र के लिए अन्न एवं रस टपकाते हो तथा चमस नामक पात्रों में बैठे हो. (२)

EN English Translation

Oh, very intoxicating Mon! You drip food and juice for Indra and are sitting in containers called Chamas. (2)

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