Popular:
ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 63 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 63 • ऋचा / मन्त्र 5

9.63.5

Mantra ID: 9.63.5

इन्द्रं॒ वर्ध॑न्तो अ॒प्तुरः॑ कृ॒ण्वन्तो॒ विश्व॒मार्य॑म् । अ॒प॒घ्नन्तो॒ अरा॑व्णः ॥ (५)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 9.63.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सोम इंद्र को बढ़ाते हुए, उदक को प्रेरित करने वाले, हमारे काम के लिए सभी रसों को भला बनाते हुए एवं दान न देने वालों का नाश करते हुए जाते हैं. (५)

EN English Translation

Som goes on to increase Indra, the apostles of Udak, making all the juices good for our work and destroying those who do not give alms. (5)

卐 HinduText AI