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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 66 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 66 • ऋचा / मन्त्र 5

9.66.5

Mantra ID: 9.66.5

तव॑ शु॒क्रासो॑ अ॒र्चयो॑ दि॒वस्पृ॒ष्ठे वि त॑न्वते । प॒वित्रं॑ सोम॒ धाम॑भिः ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.66.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! तुम्हारी ज्वलनशील एवं तेजपूर्ण रशमियां झुलोक के ऊपर वाले भाग पर जल का विस्तार करती हैं. (५)

EN English Translation

Hey Mon! Your inflammable and fast rushes extend the water on the upper part of the jhuloka. (5)

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