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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 67 • Mantra / Rik 7

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 67 • ऋचा / मन्त्र 7

9.67.7

Mantra ID: 9.67.7

पव॑मानास॒ इन्द॑वस्ति॒रः प॒वित्र॑मा॒शवः॑ । इन्द्रं॒ यामे॑भिराशत ॥ (७)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.67.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

भेड़ की ऊन से बने दशापवित्र को पार करके धाराओं के रूप में कलश में गिरते हुए एवं शीघ्र नशा करने वाले सोम अपनी गतियों से इंद्र को प्राप्त होते हैं. (७)

EN English Translation

Soma, who crosses the Dashapavitra made of sheep's wool and falls into the kalash in the form of streams and is intoxicated quickly, gets Indra from his motions. (7)

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