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9.78.1
प्र राजा॒ वाचं॑ ज॒नय॑न्नसिष्यदद॒पो वसा॑नो अ॒भि गा इ॑यक्षति । गृ॒भ्णाति॑ रि॒प्रमवि॑रस्य॒ तान्वा॑ शु॒द्धो दे॒वाना॒मुप॑ याति निष्कृ॒तम् ॥ (१)
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ऋग्वेद मन्त्र 9.78.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
दीप्तिशाली सोम शब्द उत्पन्न करते हुए निचुड़ते हैं एवं जल को आच्छादित करते हुए स्तुतियों को प्राप्त करते हैं. सोम का फोक भेड़ के बालों से बना दशापवित्र ग्रहण करता है. सोम शुद्ध होकर देवों के स्थान को जाते हैं. (१)
EN English Translation
The radiant som scurts while generating words and receives praises while covering the water. Som's folk takes the dasapavitra made of sheep's hair. Soma goes to the place of the gods by being purified. (1)