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9.86.30
त्वं प॒वित्रे॒ रज॑सो॒ विध॑र्मणि दे॒वेभ्यः॑ सोम पवमान पूयसे । त्वामु॒शिजः॑ प्रथ॒मा अ॑गृभ्णत॒ तुभ्ये॒मा विश्वा॒ भुव॑नानि येमिरे ॥ (३०)
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ऋग्वेद मन्त्र 9.86.30 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे शुद्ध होते हुए सोम! तुम देवों के निमित्त रस धारण करने वाले दशापवित्र पर निचोड़े जाते हो. अभिलाषा करने वाले प्रमुख पुरोहित तुम्हें ग्रहण करते हैं. सारे प्राणी तुम्हारे लिए अपने-आपको अर्पित करते हैं. (३०)
EN English Translation
O you are pure, Mon! You are squeezed on the dashapavittra that holds the juice for the sake of the gods. The chief priests who desire receive you. All beings offer themselves to you. (30)