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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 86 • Mantra / Rik 48

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 86 • ऋचा / मन्त्र 48

9.86.48

Mantra ID: 9.86.48

पव॑स्व सोम क्रतु॒विन्न॑ उ॒क्थ्योऽव्यो॒ वारे॒ परि॑ धाव॒ मधु॑ प्रि॒यम् । ज॒हि विश्वा॑न्र॒क्षस॑ इन्दो अ॒त्रिणो॑ बृ॒हद्व॑देम वि॒दथे॑ सु॒वीराः॑ ॥ (४८)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.86.48 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे हमारी स्तुति के जानने वाले व उक्थमंत्रों द्वारा प्रशंसा करने योग्य सोम! तुम हमारे यज्ञ के लिए टपको तथा भेड़ के बालों से बने दशापवित्र पर अपना मधुर रस गिराओ. हे दीप्तिशाली सोम! तुम मानवों का भक्षण करने वाले सब राक्षसों को मारो. शोभन संतान वाले हम महान्‌ धन पाकर यज्ञो में तुम्हारी बहुत स्तुति करेंगे. (४८)

EN English Translation

O Mon, who knows our praise and is praiseworthy of by the ukathamtras! You tap for our yajna and drop your sweet juice on the dashapavitra made of sheep's hair. O radiant Mon! You kill all the demons that eat humans. We with shobhan children will get great wealth and praise you a lot in the yajnas. (48)

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