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9.87.5
ए॒ते सोमा॑ अ॒भि ग॒व्या स॒हस्रा॑ म॒हे वाजा॑या॒मृता॑य॒ श्रवां॑सि । प॒वित्रे॑भिः॒ पव॑माना असृग्रञ्छ्रव॒स्यवो॒ न पृ॑त॒नाजो॒ अत्याः॑ ॥ (५)
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ऋग्वेद मन्त्र 9.87.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
ये सोम गाय के दूध, दही व हजारों अन्नों को लक्ष्य करके दशापवित्र के छेदों से छनते हुए महान् अन्न और अमृत के लिए इस प्रकार शुद्ध किए जाते हैं, जिस प्रकार सेना को जीतने वाला अश्व नहलाया जाता है. (५)
EN English Translation
These soms are aimed at cow's milk, curd and thousands of grains and purified for great food and amrit by filtering them through the holes of dashapavitra in such a way that a horse that wins the army is bathed. (5)