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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 98 • Mantra / Rik 11

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 98 • ऋचा / मन्त्र 11

9.98.11

Mantra ID: 9.98.11

ते प्र॒त्नासो॒ व्यु॑ष्टिषु॒ सोमाः॑ प॒वित्रे॑ अक्षरन् । अ॒प॒प्रोथ॑न्तः सनु॒तर्हु॑र॒श्चितः॑ प्रा॒तस्ताँ अप्र॑चेतसः ॥ (११)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.98.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

प्रत्येक प्रातःकाल में प्राचीन सोम दशापवित्र के ऊपर निचोड़े जाते हैं. सोम छिपे हुए, ज्ञानरहित एवं चोरों को प्रातःकाल ही भगा देते हैं. (११)

EN English Translation

Every morning the ancient somas are squeezed over the dashapavittra. Som drives away the hidden, the knowledgeless and the thieves in the morning itself. (11)

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