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सामवेद

Chapter / Prapathak 15 • Dashati / Sukta 8 • Mantra 2

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 15 • दशती / सूक्त 8 • मन्त्र 2

15.8.2

Mantra ID: 15.8.2

पवमान नि तोशसे रयिँ सोम श्रवाय्यम् । इन्दो समुद्रमा विश ॥ (२)

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सामवेद मन्त्र 15.8.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! आप पवित्र व संतुष्टिदायक हैं. आप दुष्टों को दंड देने की कृपा कीजिए. हम आप का आह्वान करते हैं. (२)

EN English Translation

O Mon! You are pure and gratifying. Please punish the wicked. We call upon you. (2)

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