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सामवेद

Chapter / Prapathak 15 • Dashati / Sukta 8 • Mantra 7

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 15 • दशती / सूक्त 8 • मन्त्र 7

15.8.7

Mantra ID: 15.8.7

पवस्व सोम महान्त्समुद्रः पिता देवानां विश्वाभि धाम ॥ (७)

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सामवेद मन्त्र 15.8.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! आप पवित्र, रसीले व पालक हैं. देवताओं के सभी धामों को अपने दिव्य रस से परिपूर्ण करने की कृपा कीजिए. (७)

EN English Translation

O Mon! You are pure, succulent and spinach. Please fill all the dhams of the gods with your divine juice. (7)

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