Popular:
सामवेद

Chapter / Prapathak 18 • Dashati / Sukta 3 • Mantra 6

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 18 • दशती / सूक्त 3 • मन्त्र 6

18.3.6

Mantra ID: 18.3.6

समु प्रियो मृज्यते सानो अव्ये यशस्तरो यशसां क्षैतो अस्मे । अभि स्वर धन्वा पूयमानो यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः ॥ (६)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

सामवेद मन्त्र 18.3.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! क्षिति (पृथ्वी) पर प्रकट हों आप यशस्तियों में यशवान, छका देने वाले और पवित्र हैं. हे यजमानो! आप सब स्वस्ति वचनों से सदैव उच्च स्वर से प्रार्थनाएं करते हुए सोम की स्तुति कीजिए. (६)

EN English Translation

O Mon! Appear on the horizon (earth) You are successful, deceiving and holy in the fame. O hosts! All of you always pray with a loud voice with swasti words and praise Soma. (6)

卐 HinduText AI