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सामवेद

Chapter / Prapathak 5 • Dashati / Sukta 11 • Mantra 8

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 5 • दशती / सूक्त 11 • मन्त्र 8

5.11.8

Mantra ID: 5.11.8

य उस्रिया अपि या अन्तरश्मनि निर्गा अकृन्तदोजसा । अभि व्रजं तत्निषे गव्यमश्व्यं वर्मीव धृष्णवा रुज । ॐ वर्मीव धृष्णवा रुज ॥ (८)

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सामवेद मन्त्र 5.11.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सोम बादलों में जल को छिन्नभिन्न करते हैं. वे बादल फैलाने वाले और जल को धारण करने वाले हैं. वे राक्षसों द्वारा हरे गए गायों और घोड़ों को घेर लेते हैं. वे शत्रुनाशक हैं. कवचधारी वीर के समान सोम शत्रुओं को मार देते हैं. (८)

EN English Translation

Som scatters water in clouds. They are cloud-spreaders and water-holding. They surround cows and horses greened by demons. They are enemies. Like the armored hero, Soma kills the enemies. (8)

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