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सामवेद

Chapter / Prapathak 6 • Dashati / Sukta 3 • Mantra 7

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 6 • दशती / सूक्त 3 • मन्त्र 7

6.3.7

Mantra ID: 6.3.7

आ प्रागाद्भद्रा युवतिरह्नः केतून्त्समीर्त्सति । अभूद्भद्रा निवेशनी विश्वस्य जगतो रात्री ॥ (७)

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सामवेद मन्त्र 6.3.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सूर्य॒ की किरणों को समेटने वाली रात्रि रूपी स्त्री आ गई है. यह सारे संसार को आराम देने वाली है. यह सारे संसार का कल्याण चाहने वाली है. (७)

EN English Translation

The night-like woman who covers the rays of the sun has come. It is going to relax the whole world. It seeks the welfare of the whole world. (7)

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