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ईशावास्योपनिषद् (ईशोपनिषद्) • अध्याय 1, मन्त्र 11

Ishavasya Upanishad (Isha) • शुक्ल यजुर्वेद (Shukla Yajurveda)

ईशावास्योपनिषद् (ईशोपनिषद्) • अध्याय 1 • मन्त्र 11

Ishavasya Upanishad (Isha) 1.11

Mantra: 1.11 [Ishopanishad_1.11]

विद्यां चाविद्यां च यस्तद्वेदोभयँ सह । अविद्यया मृत्युं तीर्त्वा विद्ययाऽमृतमश्नुते ॥ ११॥

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उपनिषद मन्त्र संख्या 11 का आध्यात्मिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

अब विद्या और अविद्या की साथ उपासना से ही अमृत लाभ होता है। इसका वर्णन करते हैं।

जो मनुष्य विद्या को और अविद्या को अर्थात् ज्ञान और कर्म दोनों को साथ साथ जानता है, वह अविद्या अर्थात् कर्म काण्ड के अनुष्ठान से निर्मलान्तः करण वाला पुरुष मृत्यु को तर कर विद्या अर्थात् यथार्थ ज्ञान से मोक्ष को प्राप्त होता है। ॥११॥
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