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ईशावास्योपनिषद् (ईशोपनिषद्) • अध्याय 1, मन्त्र 12

Ishavasya Upanishad (Isha) • शुक्ल यजुर्वेद (Shukla Yajurveda)

ईशावास्योपनिषद् (ईशोपनिषद्) • अध्याय 1 • मन्त्र 12

Ishavasya Upanishad (Isha) 1.12

Mantra: 1.12 [Ishopanishad_1.12]

अन्धं तमः प्रविशन्ति येऽविद्यामुपासते । ततो भूय इव ते तमो य उ विद्यायाँ रताः ॥ १२॥

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उपनिषद मन्त्र संख्या 12 का आध्यात्मिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

परमेश्वर को छोड़ कर जो लोग (असम्भूति ) कारण प्रकृति की उपासना करते हैं वे गहरे अन्धकार में प्रवेश करते हैं, उनसे अधिक वे अन्धकार में प्रविष्ट होते हैं जो ( सम्भूति ) कार्य प्रकृति अर्थात् पृथिव्यादि के विकार पाषाणादि कार्य जगत् की ईश्वर भावना से उपासना करते हैं। ॥१२॥
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