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Katha Upanishad (Kathopanishad) 1.16
तमब्रवीत्प्रीयमाणो महात्मा वरं तवेहाद्य ददामि भूयः। तवैव नाम्ना भवितायमग्निः सृङ्कां चेमामनेकरूपां गृहाण॥ १६॥
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उपनिषद मन्त्र संख्या 16 का आध्यात्मिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
और भी देता हूँ। यह अग्नि तेरे ही नामसे प्रसिद्ध होगा और तू इस
अनेक रूपवाली मालाको ग्रहण कर॥ १६॥